सिर्फ 100 मीटर की दूरी और भारत को रोज हो रहा ₹13 करोड़ का नुकसान, पूर्वोत्तर में दबा है गैस का महाभंडार भारत की प्रमुख घरेलू ऊर्जा कंपनियों ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) से एक मांग की है। कंपनियों ने अपनी मांग में कहा है कि कॉमन कैरियर पाइपलाइनों को क्षेत्रीय पाइपलाइनों से जोड़ने पर लगी पाबंदी को तुरंत हटाया जाए। इस एक कदम से देश के कुल गैस उत्पादन का लगभग 10% हिस्सा तुरंत इस्तेमाल के लिए अनलॉक हो सकता है, जिससे राष्ट्रीय आपूर्ति पर दबाव काफी कम हो जाएगा। इन कंपनियों में ऑयल इंडिया (OIL), ओएनजीसी (ONGC), हिंदुस्तान ऑयल एक्सप्लोरेशन कंपनी, ऑयलमैक्स एनर्जी और वेदांता शामिल हैं। वर्तमान में देश के पूर्वोत्तर हिस्से से होने वाले कुल घरेलू गैस उत्पादन का लगभग 15% हिस्सा यानी करीब 14 मिलियन मीट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन (MMSCMD) गैस बिना किसी इस्तेमाल के बेकार पड़ा है। दूसरी तरफ, भारत को भारी किल्लत के चलते 19 से 20 डॉलर प्रति mmbtu की महंगी दर पर 95 MMSCMD एलएनजी (LNG) का आयात करना पड़ रहा है। इकनॉमिक टाइम्स के अनुसार इस वजह से देश को हर साल लगभग 50 करोड़ डॉलर (करीब 4757 करोड़ रुपये) का भारी विदेशी मुद्रा नुकसान हो रहा है। रोजाना का यह नुकसान करीब 13 करोड़ रुपये होता है। पूर्वोत्तर में तीन प्रमुख पाइपलाइन नेटवर्क हैं: दुलियाजान-नुमालीगढ़ पाइपलाइन, असम गैस कंपनी लिमिटेड (AGCL) नेटवर्क और इंद्रधनुष गैस ग्रिड लिमिटेड (IGGL) रीजनल लाइन। ये तीनों पाइपलाइनें नुमालीगढ़ रिफाइनरी के महज 100 मीटर के दायरे में आकर खत्म हो जाती हैं, लेकिन PNGRB के मौजूदा नियमों के कारण इन्हें कानूनी रूप से आपस में जोड़ा नहीं जा सकता। उत्पादक कंपनियों का कहना है कि अगर नियामक (PNGRB) नियमों में सिर्फ एक अस्थायी छूट दे दे, तो महज 6 हफ्तों के भीतर ऊपरी असम क्षेत्र में बेकार पड़ी लगभग 8 MMSCMD गैस को ग्रिड में डाला जा सकता है। ऊपरी असम क्षेत्र में साल 1889 से गैस का उत्पादन हो रहा है और यहां लगभग 200 अरब घन मीटर का रिकवरेबल रिजर्व मौजूद है। ऑयल इंडिया का दुलियाजान, ओएनजीसी का लकवा व गेलेकी और त्रिपुरा का अगरतला डोम दशकों से रिफाइनरियों और बिजली संयंत्रों...#oil #ongc #pngrb #agcl #iggl