विपक्ष को संसद से सड़क की राजनीति की ओर बढ़ना होगा राजनीतिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने विपक्ष की राजनीति में मूलभूत बदलाव की आवश्यकता जताते हुए कहा कि भारत के लोकतांत्रिक परिदृश्य में ऐसा बदलाव आ चुका है कि विपक्षी दल अब केवल संसद और चुनावों पर निर्भर नहीं रह सकते। यादव ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए विपक्ष को शांतिपूर्ण जनआंदोलन खड़े करने होंगे और चुनावी राजनीति से प्रतिरोध की राजनीति की ओर बढ़ना आवश्यक है। यादव ने 'व्हिदर ऑपोजिशन: फ्रॉम इलेक्टोरल पॉलिटिक्स टू पॉलिटिक्स ऑफ रेजिस्टेंस' विषय पर एमपी वीरेंद्र कुमार स्मृति व्याख्यान में कहा कि विपक्ष को चुनावी राजनीति के बजाय लोकतांत्रिक संघर्ष के मंच पर आगे बढ़ना होगा। उन्होंने बताया कि मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर), परिसीमन के प्रस्तावित कदम और 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' जैसे नीतिगत बदलाव चुनावी प्रतिस्पर्धा की संरचना को बदलने की कोशिश कर रहे हैं। इन कदमों से निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं, चुनाव की तारीख और मतदान के तरीके निर्धारित हो सकते हैं। यादव ने कहा कि पिछले दशक में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौतियां संसद से नहीं, बल्कि किसान आंदोलन, नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) विरोधी आंदोलन और भूमि अधिग्रहण कानून के खिलाफ अभियानों से आईं। उन्होंने लोकतांत्रिक प्रतिरोध के लिए किसान संगठन, नागरिक समाज समूह, मानवाधिकार संगठन, शिक्षा और रोजगार से जुड़े आंदोलनों की भागीदारी की आवश्यकता जताई। हाल में हुए कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के आंदोलन के उल्लेख करते हुए यादव ने 20 जुलाई को दिल्ली में हुए जुटान को प्रतिरोध की राजनीति का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि आयोजकों ने 10,000 से 15,000 लोगों के आने की उम्मीद रखी थी, लेकिन इससे कहीं अधिक लोग आए और अधिकांश लोग स्वयं प्रेरित होकर आए। आंदोलन को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग से आगे बढ़कर सभी के लिए समान गुणवत्ता वाली शिक्षा और रोजगार के अधिकार के लिए अभियान चलाना चाहिए। उन्होंने आंदोलन को दिल्ली से निकालकर देशभर के जिलों तक ले जाने का आह्वान किया।...#education_minister_dharmendra_pradhan #yogendra_yadav #virendra_kumar #cocker_rojgar_party #rsp_senator_n_k_premchandran