भारत ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के धार्मिक स्थलों के संबंध में दिए गए बयान पर कड़ा पलटवार किया है। विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का पाकिस्तान को कोई अधिकार नहीं है। मंत्रालय ने इस बयान को बेबुनियाद और राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बताया है। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान का मानवाधिकार रिकॉर्ड बेहद खराब है और इसको लेकर विश्व भर में आलोचना और चिंता होती रही है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से विभिन्न धर्मों के अल्पसंख्यकों के खिलाफ उत्पीड़न और भेदभाव के लिए जाना जाता है। ऐसे में भारत पर टिप्पणी करना पूरी तरह हास्यास्पद है। जायसवाल ने बताया कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति के बयान वहां की नफरत और कट्टरता पर आधारित राष्ट्रीय नीतियों को दर्शाते हैं। इस बयान में जरदारी ने भारत में ऐतिहासिक मुस्लिम धार्मिक स्थलों के खतरे की चिंता जताई थी और कहा था कि इस तरह की घटनाएं भारत में अराजकता पैदा कर सकती हैं। भारत ने इन दावों को अपुष्ट और भ्रामक जानकारी पर आधारित बताया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ने भारत के आंतरिक मामलों, खासकर अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों पर बिना तथ्यों के टिप्पणी की है। मंत्रालय ने दिसंबर 2025 में भी पाकिस्तान के आरोपों को खारिज किया था, जिसमें भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ कथित दुर्व्यवहार की बात कही गई थी। उस समय भारत ने कहा था कि पाकिस्तान अपने यहां विभिन्न धर्मों के अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे भयावह और व्यवस्थित उत्पीड़न से ध्यान हटाने के लिए भारत पर उंगली उठा रहा है। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने भारत में कथित तौर पर धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने की घटनाओं पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ध्यान देने की अपील की थी। इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान को अपने हालात सुधारने की सलाह दी थी। इसके अलावा अप्रैल 2025 में भारत ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम को लेकर पाकिस्तान की आलोचना को भी कड़े शब्दों में खारिज किया था। उस समय विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारत की संसद...#pakistan #india #asif_ali_zardari #foreign_ministry #distrust
