कुमाऊं विश्वविद्यालय में ‘भारतीय साहित्य और भाषा’ पुनश्चर्या कार्यक्रम नैनीताल में आयोजित ‘भारतीय साहित्य और भाषा’ विषयक पुनश्चर्या कार्यक्रम का समापन 24 मार्च 2026 को हुआ। इस कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई, जिसमें भाषा और साहित्य के महत्व, विश्वविद्यालय शिक्षा के नए तरीकों, और डिजिटल युग में भाषा अध्ययन की भूमिका के बारे में विस्तारपूर्वक बात की गई। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विश्वविद्यालयों और संस्थानों के विशिष्ट विद्वानों ने अपने विचार व्यक्त किए। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर नवीन चन्द्र लोहनी ने समापन समारोह में कहा कि भाषा और साहित्य देश की संस्कृति, इतिहास और समाज की चेतना के महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में मातृभाषा की भूमिका पर जोर दिया और बहुभाषिकता के महत्व को वर्तमान समय की आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में भाषा अध्ययन को तकनीक-सम्मत और संवादपरक बनाना आवश्यक है। इसके अलावा, अंग्रेजी, फ्रेंच, जापानी और मंदारिन जैसी अंतरराष्ट्रीय भाषाओं को पाठ्यक्रम में शामिल करने पर जोर दिया गया। एमएमटीटीसी के सह-निदेशक प्रोफेसर रीतेश साह ने कहा कि कार्यक्रम के दौरान हुए संवाद और विचार-विमर्श ने प्रतिभागियों में नई शैक्षणिक ऊर्जा का संचार किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम विद्वानों के बीच अंतराल बनाए रखने और नए विचारों के आदान-प्रदान के लिए महत्वपूर्ण हैं। निदेशक प्रोफेसर दिव्या यू.#nainital #national_education_policy_2020 #kumaun_university #uttarakhand_open_university #hindi_news
