प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राज्यसभा में दिए गए संबोधन में ईरान-इजरायल युद्ध के असर पर चर्चा करते हुए, भारत की आर्थिक दृढ़ता और विकास दर पर कोई वृद्धि नहीं होने के अनुमान लगाए गए हैं। निम्नलिखित बिंदुओं के आधार पर इस विषय पर विश्लेषण किया जा सकता है: ईरान युद्ध के असर पर भारत की आर्थिक दृढ़ता पेट्रोलियम आयात और विदेशी व्यापार पर निर्भरता: भारत के व्यापार के 90% से अधिक विदेशी जहाजों के माध्यम से होता है, जो वैश्विक संकट के दौरान असुरक्षितता ले जा सकता है। हालांकि, प्रधानमंत्री ने "आत्मनिर्भर भारत" मिशन के तहत स्वदेशी जहाजों के निर्माण और घरेलू ईंधन आपूर्ति के लिए एलपीजी (LPG) और पीएनजी (PNG) के उपयोग को बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं। अंतर्राष्ट्रीय बाजारों पर नियंत्रण: भारत के आर्थिक आधार की मजबूतता के कारण, ईरान युद्ध के असर आर्थिक विकास दर पर नहीं आएगा, बल्कि इसके अल्पकालिक और दीर्घकालिक प्रभावों के लिए एक "इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप" का गठन किया गया है। भारत की तैयारी और रणनीति काला बाजार और जमाखोरी के खिलाफ रुख: प्रधानमंत्री ने राज्य सरकारों को आवश्यक वस्तुओं की निगरानी और जमाखोरी के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं, जो आम जनता के लिए महंगाई को कम करने के लिए आवश्यक है। आत्मनिर्भरता के लक्ष्य: "आत्मनिर्भर भारत" मिशन के तहत 70,000 करोड़ रुपये के अभियान के माध्यम से स्वदेशी जहाजों के निर्माण के लिए तैयारी की गई है, जो वैश्विक संकट के दौरान भारत की आर्थिक सुरक्षा को बढ़ावा देगा। ईरान युद्ध के असर पर भारत की विकास दर पर आशंका वैश्विक तेल मूल्यों पर निर्भरता: ईरान युद्ध के असर वैश्विक तेल मूल्यों पर हो सकता है, जो भारत के आयात पर निर्भरता के कारण आर्थिक विकास दर पर असर डाल सकता है। हालांकि, भारत के आर्थिक आधार की मजबूतता और घरेलू ईंधन आपूर्ति के लिए उपायों के कारण इस आशंका को कम करने के लिए तैयारी की गई है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश: भारत के विदेशी निवेश और व्यापार के लिए वैश्विक बाजारों की अस्थिरता के असर कम हो सकता है, लेकिन भारत के आर्थिक आधार की मज...#prime_minister_narendra_modi #iran_israel_war #atmanirbhar_bharat_mission #indian_economy #inter_ministerial_group
