ईंधन संकट और भारत की चुनौतियां: एक विश्लेषण संकट के कारण: स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ के बंद होने के कारण वैश्विक ईंधन आपूर्ति पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। इस जलडमरू के माध्यम से दुनिया के 20% ईंधन गुजरता है, जिसमें भारत के अधिकांश तेल आयात के लिए निर्भर है। इरान-इराक युद्ध के कारण इस रास्ते पर आवाजाही बाधित हो गई है, जिसके कारण भारत के ईंधन आपूर्ति में वृद्धि हो रही है। भारत के ईंधन आयात के आंकड़े: भारत के लगभग 2.5 से 2.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन ईंधन स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से आता है, जो इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत से आता है। रूस से आयात करके इस आपूर्ति के कुछ हिस्से की भरपाई की जा सकती है। मार्च में रूस से आयात लगभग 1 से 1.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच सकती है, जिससे भारत की वास्तविक कमी कम हो सकती है। सरकार के उपाय: रूस और अन्य देशों से ईंधन आयात बढ़ाई गई है। ईंधन आपूर्ति के लिए विशेष आवंटन और बाजार नियंत्रण के उपाय किए गए हैं। कमर्शियल एलपीजी की समस्या: घरेलू एलपीजी की आपूर्ति में कमी के कारण रेस्तरां, होटल और छोटे व्यवसाय प्रभावित हो रहे हैं। ब्लैक मार्केटिंग के कारण ईंधन की कमी बढ़ रही है, जिसके चलते राजनीतिक आंदोलन भी शुरू हो गए हैं। राजनीतिक चुनौतियां: समाजवादी पार्टी के सांसद डिंपल यादव ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह ईंधन संकट के बारे में नहीं बोल रही है। अयोध्या में राम रसोईयां बंद हो गई हैं, जिसे राम के नाम पर चलने वाले व्यवसायों के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। समाप्ति: भारत के ईंधन आपूर्ति पर गंभीर चुनौतियां हैं, लेकिन रूस और अन्य देशों से आयात के माध्यम से इसे भरपूर करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, घरेलू एलपीजी की कमी और ब्लैक मार्केटिंग के कारण राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है, जिसके चलते सरकार के निर्णयों पर लोगों की आशंका बनी हुई है।#strait_of_hormuz #united_arab_emirates #saudi_arabia #kuwait #iran_irak_war
