छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से चल रहे महानदी जल विवाद के समाधान की उम्मीद आगामी तीन महीनों में हो सकती है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नई दिल्ली से लौटने के बाद यह घोषणा की कि दोनों राज्यों के बीच इस विवाद का समाधान तीन महीनों के भीतर हो सकता है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की मौजूदगी में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) को दोनों राज्यों के हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने के लिए अधिकृत कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि केंद्र और दोनों राज्यों की डबल इंजन सरकारों के कारण बेहतर समन्वय हुआ है, जिससे वर्षों पुराने विवाद के समाधान की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि आगामी तीन महीनों के भीतर इस विवाद के ठोस परिणाम सामने आएंगे, जिससे दोनों राज्यों के नागरिकों को राहत मिलेगी। महानदी जल विवाद की टाइमलाइन के अनुसार, इस विवाद की शुरुआत 1983 में हुई जब छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच महानदी के पानी के उपयोग और बैराज निर्माण को लेकर असहमतियां शुरू हुईं। 2016-2018 के दौरान छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा महानदी बेसिन में विभिन्न औद्योगिक और सिंचाई परियोजनाओं के तहत बैराज निर्माण किए जाने पर ओडिशा सरकार ने आपत्ति जताई और पानी रोकने का आरोप लगाया। 2018 में लंबे कानूनी और राजनीतिक संघर्ष के बाद केंद्र सरकार ने महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण (Mahanadi Water Disputes Tribunal) का गठन किया। 2026 में केंद्र और दोनों राज्यों की डबल इंजन सरकारों के बीच हुए समन्वय तथा केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की उपस्थिति में हुई हालिया बैठक के बाद केंद्रीय जल आयोग को अगले तीन महीनों के भीतर इस विवाद का अंतिम समाधान निकालने के लिए अधिकृत किया गया है। इस बैठक में दोनों राज्यों के बीच विवाद के अंतिम निर्णय के लिए एक समन्वयित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया गया है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने अपनी दिल्ली यात्रा के दौरान कटघोरा-डोंगरगढ़ रेल परियोजना के मार्ग प्रशस्त होने की जानकारी दी। इस परियोजना के तहत 295 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन के निर्माण के लिए केंद...#odisha #chhattisgarh #maharashtra_water_disputes_triumph #central_water_council #cr_patil
