'चिरैया' देख मर्दों को क्यों लगी मिर्च? OTT की 'धुरंधर' बनी ये वेब सीरीज, पर 5 कमियों से पिटी भद! दिव्या दत्ता की नई सीरीज 'चिरैया' की खूब चर्चा हो रही है। हर कोई कह रहा है कि इसे एक बार जरूर देखनी चाहिए। मैंने भी वक्त निकालकर 6 एपिसोड वाली सीरीज देख तो ली है, लेकिन कुछ कमियां भी निकलीं। क्या आपने नोटिस किया? स्त्री जीवन तेरी यही कहानी, आंचल में है दूध और आंखों में पानी। मैथिलीशरण गुप्त की ये पंक्तियां आज से नहीं, बल्कि युगों से चली आ रही औरतों की स्थिति पर हैं। समाज, देश और लोग कितने ही आगे क्यों न बढ़ गए हों, लेकिन औरतों की कहानी आज भी लगभग वही है। इसी बात को करीब से दिखा रही है सीरीज 'चिरैया'। इसमें दिव्या दत्ता लीड रोल में हैं, लेकिन लीड रोल प्ले करने लायक काम नहीं कर पाईं हैं। ये बात मैं क्यों लिख रही हूं, समझाते हैं। मैरिटल रेप की समस्या यह है कि इसे साबित करना बहुत मुश्किल होता है और सब कुछ ऊपर से ठीक लगता है, लेकिन बंद दरवाजों के पीछे क्या होता है, यह कोई नहीं जान पाता। 'चिरैया' दिखाती है कि कैसे दशकों से चली आ रही सामाजिक रूढ़िवादिता इसे सामान्य बना देती है। लेकिन ये सीरीज इतने सेंसेटिव टॉपिक को दिखा तो रही है, पर ठंडी पड़ी हुई चाय की तरह। कहने का मतलब ये है कि सीन्स देखकर सिहरन पैदा हो, इसे उसी तरह से गढ़ा गया है। पर कहानी के साथ प्लॉट पर भी थोड़ा ध्यान दिया जाता तो क्या बात होती। मैरिटल रेप जैसे टॉपिक की रेड़ क्यों पिट गई? दूसरी और सबसे अहम बात, बात है मैरिटल रेप की और सीरीज के सीन्स काटकर सोशल मीडिया पर मीम्स बन रहे हैं। लड़कों ने तो जैसे बाढ़ ला दिया है। उनका कहना है कि आजकल की लड़कियों को शादी से पहले 10 बॉयफ्रेंड रहना सामान्य है, लेकिन इसके बाद भी बलात्कार की घटनाएं होती हैं। इसके बारे में जागरूकता बढ़ाना चाहिए, लेकिन सीरीज के दृश्य बहुत बेचैन कर रहे हैं। लेखक के बारे में कनिका सिंह नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में सीनियर डिजीटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। वे नवभारत टाइम्स की 'एंटरटेनमेंट' टीम से जुड़ी हैं। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और डिजिटल जर्नलिज्म में उनका 7 साल लंबा अनुभव है, जिसमें उन्होंने रिपोर्टिंग और डेस्क प...#kanika_singh #divya_datta #chiraya #navbharat_times #marital_rape
