महाराष्ट्र सरकार ने इच्छा-मृत्यु के मामलों के लिए मेडिकल पैनल बनाने का आदेश जारी किया महाराष्ट्र सरकार ने शुक्रवार को एक निर्देश जारी किया, जिसमें निजी अस्पतालों में पैसिव यूथेनेशिया (इच्छा-मृत्यु) और लिविंग विल के मामलों के निपटन के लिए प्राइमरी और सेकेंडरी मेडिकल बोर्ड बनाने का आदेश दिया गया है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के हरीश राणा मामले में 11 मार्च 2026 के फैसले के बाद लिया गया है। इस फैसले में कहा गया था कि मरीज के लिविंग विल के आधार पर जीवन बचाने वाला इलाज बंद करने के फैसलों की जांच और मंजूरी तय मेडिकल बोर्ड से होनी चाहिए। लिविंग विल एक कानूनी दस्तावेज है, जिसमें कोई व्यक्ति यह तय करता है कि अगर वह भविष्य में किसी गंभीर बीमारी, दुर्घटना या अचेत अवस्था के कारण अपनी इच्छा बताने की स्थिति में नहीं रहा, तो उसका चिकित्सीय उपचार कैसे किया जाए। इस निर्देश के तहत निजी अस्पतालों में पैसिव यूथेनेशिया मामलों की जांच की जाएगी, जिसमें मरीज के इच्छा-मृत्यु के फैसले की गंभीर जांच की जाएगी। हरीश राणा के मामले के बारे में बताया जाता है कि वह पंजाब यूनिवर्सिटी में बीटेक के छात्र रहे थे। 2013 में उन्होंने चौथी मंजिल की बालकनी से गिर गए थे। इस दुर्घटना के कारण उनके सिर में गंभीर चोटें आईं, जिससे वे 13 साल तक 'वेजिटेटिव स्टेट' में रहे। इस अवस्था में उनके शरीर के जीवित रहने के लिए चिकित्सीय सहायता जारी रही, लेकिन उनकी मौत एम्स में हुई। सुप्रीम कोर्ट ने उनके लिए जीवन रक्षक सपोर्ट हटाने की मंजूरी दी थी, जिसके बाद उनकी मौत हो गई। राणा भारत में 'पैसिव यूथेनेशिया' की मंजूरी पाने वाले पहले व्यक्ति बने। महाराष्ट्र सरकार के इस आदेश के तहत निजी अस्पतालों में लिविंग विल के मामलों की जांच के लिए दो स्तरीय मेडिकल बोर्ड बनाए गए हैं। प्राइमरी बोर्ड द्वारा मामलों की पहली जांच की जाएगी, जिसके बाद सेकेंडरी बोर्ड द्वारा अंतिम मंजूरी दी जाएगी। यह कदम इच्छा-मृत्यु के मामलों के निपटन के लिए एक संस्थागत ढांचा स्थापित करता है, जो चिकित्सा और कानून के बीच संतुलन बनाए रखता है। इस निर्देश के तहत निजी अस्पतालों में लिविंग विल के मामलों की...#medical_board #supreme_court #maharashtra_government #hariesh_rana_case #living_will

Sengar’s sentence suspension plea: HC asks AIIMS to examine him The Delhi High Court has directed AIIMS to form a medical board to assess Jaideep Sengar, who is seeking to suspend his 10-year sentence in the Unnao custodial death case due to Stage-IV oral cancer. Sengar, brother of convicted rapist Kuldeep Sengar, claims his health has deteriorated. #High_Court #Delhi_High #directed_AIIMS #assess_Jaideep #Unnao_custodial #Jaideep_Sengar #suspension_plea #oral_cancer #medical_board #custodial_death
