ईरान ने बता दी वो सख्त मांगें और शर्तें... जिन वजहों से नाकाम रही इस्लामाबाद वार्ता पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई महत्वपूर्ण बातचीत करीब 21 घंटे तक चलने के बाद बिना किसी ठोस समझौते के समाप्त हो गई। यह बातचीत 40 दिनों से जारी क्षेत्रीय तनाव और सैन्य टकराव के बीच महत्वपूर्ण मानी जा रही थी, लेकिन दोनों पक्ष किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सके। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने वार्ता बिना किसी नतीजे के समाप्त होने पर कहा है कि अमेरिका हमारा भरोसा जीतने में नाकाम रहा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सिलसिलेवार पोस्ट में कहा कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने दूरदर्शी और सकारात्मक प्रस्ताव पेश किए, लेकिन अमेरिकी पक्ष उनका विश्वास जीतने में नाकाम रहा। गालिबफ, जो खुद ईरानी प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे, उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में यह भी संकेत दिया कि बातचीत पूरी तरह असफल नहीं रही। गालिबफ ने कहा, 'अमेरिका अब ईरान के तर्क और सिद्धांतों को समझ चुका है और उसे अब यह तय करना है कि वह हमारा भरोसा हासिल कर सकता है या नहीं।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि पिछले दो युद्धों के अनुभवों ने ईरान को सतर्क बना दिया है और इसी वजह से वह अमेरिकाके साथ किसी भी समझौते को लेकर जल्दबाजी में नहीं है। मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान कूटनीति को अपने अधिकारों की रक्षा का एक अहम माध्यम मानता है और वह अपने राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के लिए हरसंभव प्रयास जारी रखेगा। उनके इस बयान से साफ है कि ईरान बातचीत के साथ सैन्य और रणनीतिक मोर्चे पर भी सक्रिय रहना चाहता है। गालिबफ ने इस वार्ता की मेजबानी के लिए पाकिस्तान का आभार जताया। उन्होंने कहा, 'मैं इस वार्ता को संभव बनाने में सहयोग के लिए पाकिस्तान का आभार व्यक्त करता हूं और वहां की जनता को सलाम करता हूं।' मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने कहा कि ईरान 9 करोड़ लोगों का एक मजबूत राष्ट्र है। मैं अपने देशवासियों का धन्यवाद करता हूं, जिन्होंने सर्वोच्च नेता के मार्गदर्शन में सड़कों पर उतरकर हमारा समर्थन किया और हमें अपनी दुआ के साथ आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा, 'इस 21 घंटे लंबी और कठिन...#pakistan #iran #qatar #lebanon #mohammad_baghher_galibaf
