भारत में कागज के नोटों के बंद होने की खबर झूठी है भारत में 30 जून 2026 से कागज के नोटों के बंद होने की खबर अफवाह है और सरकार ने इसे फर्जी बताकर स्थिति साफ कर दी है। इस खबर के वायरल होते ही लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई, लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कोई ऐसी घोषणा नहीं की है कि कागज के नोट बंद किए जाएंगे या प्लास्टिक नोट लागू किए जाएंगे। सरकार की फैक्ट-चेक एजेंसी PIB Fact Check ने इन दावों को भ्रामक बताया है और लोगों को सलाह दी है कि वे सोशल मीडिया पर चल रही फर्जी खबरों पर भरोसा न करें। सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट्स में दावा किया गया था कि 30 जून 2026 से प्लास्टिक नोटों की जगह कागज के नोट बंद हो जाएंगे, लेकिन इसके पीछे कोई आधिकारिक घोषणा नहीं है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद बताया था कि केंद्रीय बैंक पॉलिमर नोटों की संभावनाओं का अध्ययन कर रहा है। उन्होंने कहा कि RBI यह जांच रहा है कि प्लाटिक नोटों के क्या फायदे और चुनौतियां हैं और क्या इन्हें भारत में लागू करना व्यावहारिक होगा। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कोई फैसला हो चुका है या जल्द ही नोट बदल दिए जाएंगे। पॉलिमर नोट विशेष प्रकार के सिंथेटिक पदार्थ से बनाए जाते हैं, जबकि भारत में फिलहाल 100 प्रतिशत कॉटन आधारित कागजी नोट इस्तेमाल किए जाते हैं। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन और कई अन्य देशों ने पॉलिमर नोटों को अपनाया है क्योंकि ये ज्यादा टिकाऊ होते हैं, जल्दी फटते नहीं हैं, पानी और गंदगी से कम प्रभावित होते हैं, और इनमें आधुनिक सेफ्टी फीचर्स जोड़े जा सकते हैं। भारत भी पहले इस दिशा में प्रयोग कर चुका है। साल 2012 में सरकार ने कुछ शहरों में ₹10 के पॉलिमर नोटों के परीक्षण की मंजूरी दी थी, लेकिन तकनीकी और अन्य चुनौतियों के कारण यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी। डिजिटल भुगतान के बढ़ते चलन के बावजूद भारत में नकदी का उपयोग अभी भी काफी मजबूत है। RBI की ताजा रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2026 तक देश प्रचलन में मौजूद नोटों का कुल मूल्य 11.9% बढ़कर 41.23 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वहीं नोटों की संख्या 10.5% बढ़कर 171.#india #rbi #sanjay_malhotra #pib_fact_check #mpc