Chlorine Gas Leak at Godhani Water Plant Sparks Safety Probe and Evacuation A chlorine gas leak at the Maharashtra Jeevan Pradhikaran (MJP) water treatment plant in Godhani, Nagpur, has prompted an official probe and heightened safety scrutiny. Nagpur collector Kumar Ashirwad ordered a technical committee to investigate the incident, which occurred around 12:10 am on Monday. The leak originated from a reserve chlorine cylinder at the facility, which uses chlorine for water purification. The plant had two 900kg cylinders, with the leaking one being unused at the time of the incident. Ashirwad, who visited the site to assess the situation, emphasized that the committee would determine the exact cause of the leak and identify any lapses in safety protocols. The collector highlighted a critical safety concern: the storage of the chlorine cylinder in an open area rather than a sealed, contained room. He stated that hazardous gases like chlorine should be stored in fully enclosed spaces to prevent the spread of leakage to nearby residential areas. “Your cylinder was in an open environment. The building was there, but it was not closed,” he remarked, stressing that a sealed room would limit the impact of any future leaks. The incident led to the release of chlorine gas into surrounding neighborhoods, forcing residents to evacuate. Authorities, including police, the SDM, and NDRF teams, arrived at the scene to contain the leak using ice water and caustic soda. Approximately 60-70 people were evacuated, while several others were taken to hospitals. Seven patients were admitted to ICUs, though six of them showed stable oxygen saturation levels of 97-98% while on non-invasive ventilation. Ashirwad warned that their condition could fluctuate over the next two to three days, requiring close monitoring.#nagpur #godhani #kumar_ashirwad #maharashtra_jeevan_pradhikaran #ndrf

उत्तराखंड में भारी बारिश और आकाशीय बिजली के खतरे के बारे में चेतावनी भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने उत्तराखंड के पूरे क्षेत्र में 9 से 11 अगस्त 2026 तक मूसलाधार बारिश, गर्जन और आकाशीय बिजली के खतरे के बारे में चेतावनी जारी की है। इस दौरान बागेश्वर, पिथौरागढ़, चमोली और देहरादून जैसे क्षेत्रों में अत्यंत तीव्र बारिश की संभावना है, जबकि नैनीताल, टिहरी, रुद्रप्रयाग और चंपावत में भारी बारिश के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। 10 अगस्त को देहरादून, बागेश्वर और चंपावत में ऑरेंज अलर्ट रहेगा, जहां बादलों के फटने जैसी तीव्र बौछारें और बिजली चमकने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, 9 अगस्त को राज्य के सीमांत और पर्वतीय जिलों में अत्यंत तीव्र से अति तीव्र बारिश के दौर देखने को मिल सकते हैं। इसके साथ ही प्रदेश की मुख्य नदियों के जलस्तर में अप्रत्याशित बढ़ोतरी होने और संवेदनशील पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन होने की संभावना है। इस आपदा के खतरे को ध्यान में रखते हुए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और जिला प्रशासन की टीमों को तैनात कर दिया गया है। 10 अगस्त को मानसूनी बारिश का फैलाव और प्रभाव और अधिक व्यापक हो जाएगा। राजधानी देहरादून, नैनीताल, बागेश्वर और चंपावत जिलों में भारी से अत्यंत भारी बारिश के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में बादलों के फटने जैसी तीव्र बौछारें और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना है। पौड़ी गढ़वाल, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, टिहरी, चमोली, पिथौरागढ़ और उधम सिंह नगर जैसे क्षेत्रों में भी भारी बारिश का दौर जारी रहेगा। मैदानी क्षेत्रों विशेषकर हरिद्वार और उधम सिंह नगर में तेज गर्जना के साथ-साथ आकाशीय बिजली चमकने और झोंकेदार हवाएं चलने के आसार हैं। बागेश्वर, पिथौरागढ़ और नैनीताल में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी कुमाऊं मंडल के जिलों के लिए 9 और 10 अगस्त का दिन मौसम के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। मौस के अनुसार, 9 अगस्त को बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में अति तीव्र बारिश और आकाशीय बिजली चमकने की प्रबल संभावना है। 10 अगस्त को नैनीताल, बागेश्वर और चंपावत जिलों में ऑरेंज अलर्ट प्रभावी रहेगा, जहां कहीं-कहीं मूसलाधार बारिश हो सकती है।...#india #uttarakhand #imdad #ndrf #sdraf

असम में बाढ़ से 10.6 लाख से अधिक लोग प्रभावित, राहत अभियान जारी असम में बाढ़ के कारण लगभग 10.6 लाख लोग प्रभावित हुए हैं, जबकि राहत और बचाव कार्य जारी हैं। राज्य सरकार और केंद्रीय एजेंसियों के संयुक्त प्रयास से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री की वितरण और पुनर्वास कार्य चल रहे हैं। राज्य के ऊपरी असम में बाढ़ के कारण शिवसागर और नाजिरा जिलों में सबसे अधिक नुकसान हुआ है, जहां लगभग 50,000 और 30,000 लोग अभी भी राहत के बिना बाहर हैं। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने घोषणा की है कि राज्य सरकार प्रभावित लोगों तक राहत और पुनर्वास सहायता पहुंचाने के लिए 24 घंटे काम कर रही है। उन्होंने कहा कि राहत अभियान के तहत भोजन, पीने का पानी, दवाइयां और अन्य आवश्यक सामग्री लगातार वितरित की जा रही है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, बाढ़ से 11 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं, जिनमें से 47 लोगों की मौत हो चुकी है। राहत अभियान में राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), सेना और जिला प्रशासन की टीमें शामिल हैं। इन टीमों ने नावों और अन्य साधनों के माध्यम से अलग-थलग क्षेत्रों तक पहुंच के प्रयास किए हैं। बाढ़ के कारण बिजली के बुनियादी ढांचे को बुरी तरह प्रभावित किया गया है, जिससे राज्य के विभिन्न हिस्सों में 60,000 से अधिक घरों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई है। मरम्मत कार्य जारी है, लेकिन जलमग्न क्षेत्रों में पहुंच की बाधाओं के कारण देरी हो रही है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि राहत शिविरों में 41,264 लोग रह रहे हैं, जबकि 1,072 राहत वितरण केंद्र बनाए गए हैं। बाढ़ के कारण 401 घर पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, जबकि 1,856 घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 8 लोग अभी भी लापता हैं, जिनमें 6 शिवसागर, 1 धेमाजी और 1 चराइदेव से हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राहत कार्य में सहयोग करने के लिए अपने अंतरिक्ष बल के बल दिया है। राज्य सरकार ने बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए जल्द से जल्द राहत पहुंचाने के लिए विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय किया है। बाढ़ के कारण राज्य के 25 जिलों में 10,63,216 लोग प्रभावित हुए है...#assam #shivasagar #nazira #sdrf #ndrf