प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का UAE दौरा तेल संकट और मध्य पूर्व के समुद्री रास्तों पर चोक के बीच आयोजित किया गया है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 मई को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दौरा शुरू किया है, जो विश्व तेल संकट के बीच भारत के ऊर्जा सुरक्षा के महत्वपूर्ण चरण के रूप में आयोजित किया गया है। इस दौरे के दौरान ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध ने मध्य पूर्व के समुद्री रास्तों को चोक कर दिया है, जो विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए खतरा पैदा कर रहा है। इस रास्ते पर कोई भी रुकावट आती है तो तेल की कीमतों में तेजी आएगी, जो भारत के चालू खाते पर गहरा प्रभाव डाल सकती है। भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए इस रास्ते पर 85 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है, जिसके कारण तेल की कीमतों में वृद्धि हुई है। मोदी के दौरे के दौरान उन्हें UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात होगी, जहां ऊर्जा सुरक्षा और लंबे समय के कच्चे तेल और एलएनजी सप्लाई समझौतों पर चर्चा होगी। भारत और UAE के बीच एलएनजी समझौता और तेल भंडारण क्षमता के विस्तार पर भी चर्चा होगी। UAE ने हाल ही में ओपेक से बाहर निकले हैं, जिसके कारण उनके पास तेल उत्पादन बढ़ाने की आजादी है। इस बीच भारत अपनी तेल आपूर्ति के लिए UAE की मदद ले सकता है। भारत के तेल भंडारण केंद्रों के विस्तार के लिए UAE की भागीदारी की आवश्यकता है। भारत के तीन रणनीतिक तेल भंडारण केंद्र हैं, जिनकी क्षमता 5.33 एमएमटी है, जबकि दो अतिरिक्त केंद्र बनाने की योजना है, जिनकी क्षमता 6.#iran #united_arab_emirates #prime_minister_narendra_modi #hormuz_strait #oil_supply_chain