Skandmata Aarti: मां स्कंदमाता की आरती से दूर होंगे सब कष्ट, बरसेगी कृपा, इसके बिना अधूरी है पूजा चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि 23 मार्च 2026 की शाम 06 बजकर 38 मिनट से शुरू हो चुकी है। यह तिथि 24 मार्च को शाम 04 बजकर 07 मिनट तक रहेगी। इस दिन स्कंद षष्ठी का व्रत मनाया जाएगा, जिसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। शास्त्रों में बताया गया है कि किसी भी देवी-देवता की पूजा तब पूर्ण मानी जाती है जब उनकी आरती की जाए। इस आरती के द्वारा भक्तों की आस भुजाई जाती है और उन्हें सदा बचाए रखा जाता है। मां स्कंदमाता की आरती के शब्द निम्नलिखित हैं: "जय तेरी हो स्कंद माता, पांचवां नाम तुम्हारा आता। सबके मन की जानन हारी, जग जननी सबकी महतारी।" इसके बाद आरती के दोहा दोहराए जाते हैं। इसके अलावा मां स्कंदमाता के मंत्र भी शामिल हैं, जो निम्नलिखित हैं: "सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी।" "या देवी सर्वभूतेषु मां स्कंदमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।" इस आरती के साथ ही भक्तों को सलाह दी जाती है कि वे इस दिन व्रत रखें और आरती के साथ देवी की पूजा करें। इस दिन के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में भी विस्तार से बताया गया है। अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय, लाभ, सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों, ज्योतिषियों, पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं, धर्मग्रंथों और दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।#chaitra_month #shashthi_tithi #skandmata #jagran_media #pooja_vihini
