कुमाऊं विश्वविद्यालय में जड़ों की मजबूती और वैश्विक उड़ान का संगम नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय के यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र में आयोजित 15 दिवसीय भारतीय साहित्य और भाषा पुनश्चर्या कार्यक्रम का समापन हो गया। इस कार्यक्रम में देश के दस राज्यों के शिक्षकों ने भाग लिया, जहां छह भाषाओं के संगम ने एक भारत-श्रेष्ठ भारत की तस्वीर पेश की। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर नवीन चंद्र लोहनी मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की महत्ता पर जोर दिया और कहा कि मातृभाषा हमारी आत्मा की आवाज और संस्कृति की असली संवाहक है। प्रोफेसर लोहनी ने बहुभाषिकता को वैश्विक विस्तार की कुंजी बताया और भारत के विश्वगुरु बनने के लिए अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में दक्षता हासिल करने पर बल दिया। सह निदेशक प्रोफेसर रीतेश साह ने शिक्षकों को नवाचार से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। निदेशक प्रोफेसर दिव्या उपाध्याय जोशी ने इस आयोजन को बहुभाषिक और बहुसांस्कृतिक बताया। उन्होंने कहा कि भाषाओं के संगम से विश्व के विभिन्न संस्कृतियों के बीच संवाद बढ़ेगा और भारत की विश्व में अपनी ओर बढ़ते असर को मजबूत करेगा। कार्यक्रम में शामिल शिक्षकों ने भाषा के माध्यम से सांस्कृतिक और ऐतिहासिक ज्ञान के पुनश्चर्या के महत्व पर चर्चा की। इस कार्यक्रम के माध्यम से विश्वविद्यालय ने अपने शिक्षकों को वैश्विक स्तर पर अपनी भूमिका के बारे में जागरूक किया। इसके अलावा, शिक्षकों को विभिन्न भाषाओं के अध्ययन और उनके विकास के लिए नए तरीकों के बारे में जानकारी दी गई। इस कार्यक्रम के दौरान विभिन्न राज्यों के शिक्षकों ने अपने अनुभव और विचारों को साझा किया, जिससे विश्वविद्यालय के शिक्षा अधिकारियों के लिए नए विचारों का स्रोत बना। इस आयोजन के दौरान भाषा के माध्यम से सांस्कृतिक और ऐतिहासिक ज्ञान के पुनश्चर्या के महत्व पर चर्चा की गई। शिक्षकों ने अपने अनुभव और विचारों को साझा करके भाषा के विकास और उसके विभिन्न रूपों के बारे में जागरूकता बढ़ाई। इस कार्यक्रम के द्वारा विश्वविद्यालय ने अपने...#nainital #kumaon_university #uttarakhand_free_university #bharat_sahitya_aur_bhasha_punarshcharya_karyakram #professor_divya_upadhyay_joshi
