छत्तीसगढ़ में परीक्षा व्यवस्था में गंभीर अनियम और भ्रष्टाचार के मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें छात्रों के अधिकारों के उल्लंघन और न्याय की कमी देखी जा सकती है। निम्नलिखित मुख्य मुद्दे उभरे हैं: पेपर लीक और नकल के मामले 12वीं कक्षा के हिंदी पेपर के लीक के बाद छात्रों के बीच असंतुलन बढ़ गया। अतीत में एसएससी, पीएससी और व्यापमं परीक्षाओं में भी नकल और फर्जीवाड़ा के मामले सामने आए हैं, जिनमें अधिकांश मामले अंतिम जांच तक नहीं पहुंचे। भर्ती घोटाले और अनियम 2011-12 में सिविल सब इंजीनियरों की भर्ती में 383 नियुक्ेने के बजाए 275 पदों के लिए अतिरिक्त नियुक्तियां की गई। इस मामले में एफआईआर दर्ज हो गई, लेकिन अब तक कोई गिरफ्तारी या गहरी जांच नहीं हुई। अनुसंधान और जांच की कमी अधिकांश मामलों में एफआईआर तक सीमित रहता है, और वास्तविक जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होती। इसके कारण भ्रष्टाचार के बारे में जागरूकता कम है और छात्रों के अधिकार बर्बाद होते जा रहे हैं। आवश्यकताएं और सुझाव परीक्षा व्यवस्था में टेक्नोलॉजी के उपयोग को बढ़ावा देना चाहिए, जैसे ड्रेस कोड, ब्लूटूथ रोक, और ऑनलाइन जांच। नियमित जांच और जवाबदेह अधिकारियों की आवश्यकता है, ताकि भ्रष्टाचार के बारे में जागरूकता बढ़े। छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए नियमों के अंतर्गत गंभीर कार्रवाई की आवश्यकता है। निष्कर्ष: छत्तीसगढ़ में परीक्षा व्यवस्था में गंभीर अनियम और भ्रष्टाचार के मामले नियमित रूप से सामने आ रहे हैं, जिनके दूर रखने के लिए जवाबदेह अधिकारियों, टेक्नोलॉजी के उपयोग और गंभीर जांच की आवश्यकता है। इसके अलावा, छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए नियमों के अंतर्गत गंभीर कार्रवाई की आवश्यकता है।#chhattisgarh #sssc #psc #vyapam #fir
