अल-नीनो और भारतीय महासागर द्विध्रुव: मॉनसून के लिए उम्मीद और चुनौतियां प्रशांत महासागर में अल-नीनो के दौर की शुरुआत हो गई है, जो भारत के मॉनसून पैटर्न को बदल सकता है। ऑस्ट्रेलिया के ब्यूरो ऑफ मीटियोरॉलॉजी की रिपोर्ट के अनुसार, नीनो 3.4 इंडेक्स जून 2026 में +0.81°C पहुंच गया है, जो अल-नीनो की आधिकारिक सीमा (+0.80°C) से ज्यादा है। इस तापमान वृद्धि के कारण भारत में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून कमजोर हो सकता है, जिससे किसान, सरकार और आम लोग चिंतित हैं। लेकिन एक अच्छी खबर यह है कि भारतीय महासागर में पॉजिटिव भारतीय महासागर द्विध्रुव (Positive Indian Ocean Dipole या IOD) विकसित होने की संभावना है, जो अल-नीनो के नकारात्मक प्रभाव को कम कर सकता है। अल-नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है जो प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्री सतह के तापमान के असामान्य रूप से बढ़ने से जुड़ी होती है। इसके कारण भारत में अक्सर बारिश कम होती है क्योंकि अल-नीनो ऊपर की हवाओं को प्रभावित करता है। सामान्य मॉनसून में गर्म और नम हवा भारत की ओर आती है, लेकिन अल-नीनो के दौरान इंडोनेशिया और भारत के ऊपर वायुमंडल में सब्सिडेंस बढ़ जाता है, जो बादलों के बनने और बारिश को रोकता है। इसके परिणामस्वरूप सूखा, अनियमित बारिश, फसलों के नुकसान और पानी की कमी हो सकती है। हालांकि, भारतीय महासागर में पॉजिटिव IOD की उम्मीद भारत के लिए राहत की किरण बन सकती है। IOD एक जलवायु घटना है जो हिंद महासागर के पश्चिमी हिस्से और पूर्वी हिस्से के तापमान में अंतर पर आधारित है। जून 2026 में IOD इंडेक्स -0.#india #indian_ocean_dipole #al_nino #bureau_of_metereology #indian_metereological_department
