RBI की रणनीति ने भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में रिकॉर्ड इनफ्लो के साथ उम्मीद से कहीं ज्यादा सफलता हासिल की प्रवासी भारतीयों (NRI) से डॉलर जुटाने की रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की खास पहल उम्मीद से कहीं ज्यादा सफल रही। 31 अगस्त 2026 तक फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (बैंक) यानी FCNR(B) डिपॉजिट के जरिए भारत में $100 बिलियन से ज्यादा की रकम आ चुकी थी। तेज इनफ्लो को देखते हुए RBI ने इस स्कीम के लिए दी गई स्पेशल स्वैप फैसिलिटी की विंडो तय समय से करीब एक महीने पहले ही बंद कर दी। इस तेज डॉलर इनफ्लो से भारत का फॉरेक्स रिजर्व भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। 21 अगस्त तक देश का विदेशी मुद्रा भंडार $729.3 बिलियन था। इससे कुछ ही हफ्ते पहले 24 जुलाई को यह करीब $682 बिलियन था। इस वृद्धि के पीछे मिडिल ईस्ट में जारी जंग और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रभाव रहे। रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल फरवरी में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद भारत के फॉरेक्स रिजर्व में करीब $46 बिलियन की कमी आई थी। इसी दौरान 24 जुलाई तक रिजर्व करीब $682 बिलियन रह गया था, जबकि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 6% कमजोर हो चुका था। RBI का यह कदम ऐसे समय में आया जब बाहरी खाते और रुपये पर दबाव बढ़ा रहा था। इसके लिए RBI ने NRI से विदेशी मुद्रा जुटाने के लिए FCNR(B) डिपॉजिट को बढ़ावा देने की रणनीति अपनाई। FCNR(B) डिपॉजिट एक फिक्स्ड टर्म डिपॉजिट होता है जिसमें NRI अपनी विदेशी कमाई को भारत में विदेशी मुद्रा में जमा कर सकते हैं। इसमें मूलधन और ब्याज दोनों विदेशी मुद्रा में ही वापस मिलते हैं, जिससे रुपये में उतार-चढ़ाव का जोखिम नहीं उठाना पड़ता। FCNR(B) डिपॉजिट में इनफ्लो पहले कमजोर हो गया था। वित्त वर्ष 2024-25 में इस माध्यम से $7 बिलियन से ज्यादा की रकम आई थी, लेकिन FY26 में यह घटकर सिर्फ $946 मिलियन रह गई। इनफ्लो को फिर से बढ़ाने के लिए RBI ने जून 2026 में एक खास स्वैप फैसिलिटी का ऐलान किया था। इसके तहत 3 से 5 साल की अवधि वाले नए FCNR(B) डिपॉजिट पर बैंकों को रियायती स्वैप की सुविधा दी गई। इस व्यवस्था में हेजिंग की लागत RBI ने वहन की। RBI गवर्नर संजय...#rbi #sanjay_malhotra #foreign_exchange_reserves #fcnr_b #nri
